Author(s): बीजू राम, सुनील कुमार कुमेटी, बी.एल. सोनेकर

Email(s): beejuramnetam94@gmail.com

DOI: 10.52711/2454-2687.2026.00014   

Address: बीजू राम1*, सुनील कुमार कुमेटी2, बी.एल. सोनेकर3
1शोधार्थी, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर (छ.ग.)
2सह-प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर (छ.ग.)
3प्राध्यापक, अर्थशास्त्र अध्ययनशाला, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर (छ.ग.)
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 14,      Issue - 1,     Year - 2026


ABSTRACT:
छत्तीसगढ़ भारत का एक प्रमुख वनसमृद्ध राज्य है, जहाँ बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय निवास करते हैं और उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण आधार लघु वनोपज हैं। राज्य का लगभग 44 प्रतिशत भू-भाग वनाच्छादित है, जिसके कारण यहाँ लघु वनोपज का व्यापक संग्रहण एवं उपयोग होता है। सतत् विकास की अवधारणा आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन पर आधारित है। क्योंकि लघु वनोपज संग्रहण में पेड़ों की कटाई नहीं होती और वन को बिना क्षति पहुँचाए आय सृजित की जाती है। इसप्रकार लघु वनोपज पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को भी संरक्षण करता है। छत्तीसगढ़ में लघु वनोपज केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के सतत् विकास का आधार है। यह आय सुरक्षा, सामाजिक सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण एवं सामुदायिक सहभागिता का समन्वित मॉडल है। लघु वनोपज जनजातीय परिवारों की आजिविका का महत्वपूर्ण स्त्रोत के साथ-साथ सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राज्य में लघु वनोपज विपणन की त्रिस्तरीय संरचना विद्यमान है जैसे - राज्य लघु वनोपज विपणन संघ मर्यादित (1), जिला लघु वनोपज सहकारी संघ(31) और प्राथमिक वनोपज सहकारी समिति(902)। साथ ही प्रधानमंत्री वन-धन योजना के अन्तर्गत छत्तीसगढ़ में कुल 139 केन्द्रों में लगभग 17,424 महिला स्व-सहायता समूह लाभान्वित हो रहे हैं। प्रस्तुत अध्ययन से स्पष्ट होता है कि लघु वनोपज जनजातीय परिवारों के लिए नकद आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। कई परिवारों की कुल वार्षिक आय में लघु वनोपज का योगदान 40 प्रतिशत तक पाया गया है। लघु वनोपज संग्रहण एवं विपणन में नीतिगत सुधार, प्रशिक्षण एवं बाजार विस्तार के माध्यम से इस क्षेत्र को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, जिससे जनजातीय समुदायों की आत्मनिर्भरता एवं जीवन स्तर में दीर्घकालिक सुधार हो सके। प्रस्तुत अध्ययन प्राथमिक एवं द्वितीयक दोनों आंकड़ों आधारित वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक अध्ययन है।


Cite this article:
बीजू राम, सुनील कुमार कुमेटी, बी.एल. सोनेकर. छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के सतत् विकास में लघु वनोपजों की भूमिका एक आर्थिक विश्लेषण. International Journal of Reviews and Research in Social Sciences. 2026; 14(1):77-3. doi: 10.52711/2454-2687.2026.00014

Cite(Electronic):
बीजू राम, सुनील कुमार कुमेटी, बी.एल. सोनेकर. छत्तीसगढ़ में जनजातीय समाज के सतत् विकास में लघु वनोपजों की भूमिका एक आर्थिक विश्लेषण. International Journal of Reviews and Research in Social Sciences. 2026; 14(1):77-3. doi: 10.52711/2454-2687.2026.00014   Available on: https://www.ijrrssonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-14


सन्दर्भ सूची:-
1.    जैन डॉ. सुनिता, (2016)1, ‘‘अनुसूचित जाति एवं जनजाति की आर्थिक स्थिति की समीक्षात्मक अध्ययन (दमोह जिले के विशेष सन्दर्भ में)‘‘, Int. J. Reviews and Research in Social Sci. 4(4): October- December 2016, ISSN 2347-5145(Print), ISSN 2454-2687 (Online).
2.    Rai Santosh Kumar & Agrawal Dr. R.P, (2016)2, ‘‘छत्तीसगढ़ राज्य में आदिमजाति, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के आर्थिक विकास हेतु राज्य सरकार द्वारा संचालित योजनाएं Indian Journal of Applied Research, June 2016, Volume : 6, Issue : 6, ISSN - 2249-555X, IF : 3.919,  IC Value : 74.50.
3.    सेनी डॉ. रविश कुमार एवं अग्रवाल श्रीमती शिखा, (2018)3, ‘‘बस्तर संभाग में वनोपज उत्पादन एवं बाजार मांग का विश्लेषणात्मक अध्ययन‘, International Journal of Creative Research Thoughts (IJCRT), April 2018, Volume 6, Issue 2, ISSN: 2320-2882.
4.    अग्रवाल डॉ किशोर कुमार, राजेश्वरी, (2019)4, ‘‘छत्तीसगढ़ आदिवासियों के आजीविका के साधन वर्तमान परिदृश्य में‘, International Journal of Reviews and Research in Social Sciences. April- June, 2019, Vol. 07, Issue-02, ISSN 2347-5145 (Print) 2454-2687 (Online).
5.    खुटे डॉ. डी. एन. (2020)5, ‘‘पर्यावरण संरक्षण और बस्तर का धन सल्फी‘Journal of Ravishankar University, October 2020. Part-A, Vol-26.
6.    छत्तीसगढ़ शासन प्रशासनिक प्रतिवेदन वर्ष 2023-24

Recomonded Articles:

Author(s): वृन्दा सेनगुप्ता

DOI:         Access: Open Access Read More

Author(s): किशोर कुमार अग्रवाल, राजेशवरी

DOI:         Access: Open Access Read More

International Journal of Reviews and Research in Social Sciences (IJRRSS) is an international, peer-reviewed journal, correspondence in....... Read more >>>

RNI:                      
DOI:  

Popular Articles


Recent Articles




Tags