Author(s): हेमलता बोरकर वासनिक, बंसो सो नुरुटी, कमलेश गोगिया

Email(s): hemlataborkar@gmail.com , bansonuruti@gmail.com

DOI: 10.52711/2454-2687.2026.00005   

Address: हेमलता बोरकर वासनिक1, बंसो सो नुरुटी2, कमलेश गोगिया3
1 प्रोफेसर, समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग , पं. रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएससीआर), नई दिल्ली परियोजना की निदेशक।
2 सहायक प्रोफेसर, इतिहास विभाग, पं. रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत
3 समाजशास्त्र एवं समाज कार्य विभाग , पं. रविशंकर विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़, भारत और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएससीआर), नई दिल्ली परियोजना मे रिसर्च असिस्टेंट ।
*Corresponding Author

Published In:   Volume - 14,      Issue - 1,     Year - 2026


ABSTRACT:
छत्तीसगढ़ राज्य सहित भारत के विभिन्न राज्यों में शिल्पकला का क्षेत्र शिल्पकारों को आजीविका प्रदान करने के साथ ही अनेक स्वास्थ्यगत जोखिमों से भी जुड़ा हुआ है। सामान्य रूप से यह देखने में आया है कि पारंपरिक शिल्प कार्य प्रायः लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठकर या झुककर किया जाता है, जिसमें दोहरावयुक्त गतियाँ, भारी औज़ारों का प्रयोग, सूक्ष्म दृष्टि-कार्य तथा अपर्याप्त कार्यस्थल सुविधाएँ शामिल होती हैं। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य शिल्पकारों में पाई जाने वाली प्रमुख स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान करना तथा उनके कारणों और प्रभावों का विश्लेषण करना है। यह अध्ययन प्राथमिक एवं द्वितीयक स्रोतों पर आधारित है तथा विभिन्न शोध-पत्रोंए रिपोर्टों और सर्वेक्षणों के निष्कर्षों का समेकित विश्लेषण प्रस्तुत करता है। शोध अध्ययन से स्पष्ट होता है कि पीठ दर्द, गर्दन दर्द (मस्कुलोस्केलेटल विकार), दृष्टि संबंधी समस्याएँ, श्वसन रोग, त्वचा रोग, पैरों मे झुंझुनी और मानसिक तनाव शिल्पकारों में सामान्य रूप से पाए जाते हैं। अत्यधिक शारीरिक एवं मानसिक तनाव के चलते ये इस कार्य से धीरे-धीरे अपने आप को अलग करना चाह रहे हैं, आजीविका के चलते इन्हे यह कार्य मजबूरीवश करना पड़ रहा है।


Cite this article:
हेमलता बोरकर वासनिक, बंसो सो नुरुटी, कमलेश गोगिया. हस्त शिल्पकारों की स्वास्थ्यगत समस्याओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन. International Journal of Reviews and Research in Social Sciences. 2026; 14(1):23-2. doi: 10.52711/2454-2687.2026.00005

Cite(Electronic):
हेमलता बोरकर वासनिक, बंसो सो नुरुटी, कमलेश गोगिया. हस्त शिल्पकारों की स्वास्थ्यगत समस्याओं का समाजशास्त्रीय अध्ययन. International Journal of Reviews and Research in Social Sciences. 2026; 14(1):23-2. doi: 10.52711/2454-2687.2026.00005   Available on: https://www.ijrrssonline.in/AbstractView.aspx?PID=2026-14-1-5


संदर्भ:
1.    कोठियाल, एल., मोहन, आदि शिल्प का गढ़ बस्तर, कुरुक्षेत्र, नई दिल्ली, वषर्-55. अंक-9, जुलाई 2009, पृष्ठ-21-22.
2.    खुराना, ललित, संपादकीय, कुरुक्षेत्र, ग्रामीण शिल्प,  वर्ष-69, मासिक अंक-07, मई-2023, पृष्ठ-4.
3.    लाला जगदलपुरी, बस्तर इतिहास एवं संस्कृति, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, चतुर्थ संस्करण-2016, पृष्ठ-236-237.
4.    लाला जगदलपुरी, बस्तर इतिहास एवं संस्कृति, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, चतुर्थ संस्करण-2016, पृष्ठ-240.
5.    लाला जगदलपुरी, बस्तर इतिहास एवं संस्कृति, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, चतुर्थ संस्करण-2016, पृष्ठ-241.
6.    लाला जगदलपुरी, बस्तर इतिहास एवं संस्कृति, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, चतुर्थ संस्करण-2016, पृष्ठ-247-248.
7.    व्हीलर, मोर्टिमर, सिंधु सभ्यता, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, कैम्ब्रिज, 1968, गांधी, हेमा, हस्तशिल्प कला से रोजगार, कुरुक्षेत्र, ग्रामीण हस्तशिल्प, नई दिल्ली, वर्ष-55. अंक-9, जुलाई 2009, पृष्ठ-3.
8.    मिश्रा, आद्या, प्राचीन भारतीय वदमय में शिल्प और कला, वैदिक, पुराणिक, बौद्ध और जैन ग्रंथों आदि के संदर्भ में, इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एप्लाइड रिसर्च 2022; 8(12): 295-298. 
9.    भारतीय ज्ञान परंपरा में सर्वत्र पेड़-पौधों एवं वनस्पतियों के संरक्षण की है बातए विश्व संवाद केंद्र भोपाल,
10.    कैथवास, वैभव, वेदों में निहित कलाओं का सौंदर्य, श्री विनायक पब्लिकेशऩ, आगरा, 2025, पृष्ठ-145.
11.    पाण्डेय, धनपति, अन्नत, अशोक, प्राचीन भारत का राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहासए मोतीलाल बनारसीदास, दिल्ली, 1998, पृष्ठ-17.
12.    खातून, मुस्तकीमा, भारतीय हस्तशिल्प का इतिहास और विरासत तथा पश्चिम बंगाल के चयनित हस्तशिल्पों के विशेष संदर्भ में इसका बाजार, जर्नल ऑफ कल्चरल रिसर्च स्टडीज, खंड-III अंक-1 (2024), पृष्ठ 61-72। (ISSN 2583-6137)। खुराना, ललिता, संपादकीय, कुरुक्षेत्र, ग्रामीण हस्तशिल्प, नई दिल्ली, वर्ष-55. अंक-9, जुलाई 2009, पृष्ठ-2.
13.    कोठियाल, एल., मोहन, आदि शिल्प का गढ़ बस्तर,  कुरुक्षेत्र, नई दिल्ली, वषर्-55. अंक-9, जुलाई 2009, पृष्ठ-21-22.
14.    लाला जगदलपुरी, बस्तर इतिहास एवं संस्कृति, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, चतुर्थ संस्करण-2016, पृष्ठ-239.
15.    लाला जगदलपुरी, बस्तर इतिहास एवं संस्कृति, मध्यप्रदेश हिन्दी ग्रंथ अकादमी, भोपाल, चतुर्थ संस्करण-2016, पृष्ठ-239.
16.    बस्तर.गवर्मेंट.इन
17.    बैनर्जी, शिप्रा, ठाकुर, ऋचा, छत्तीसग़ढ़ के जिले गरियाबंद में कमार जनजाति द्वारा बांस कला से कलाकृति निर्माण का अध्ययनए रिसर्च रिव्यू इंटरनेशनल जर्नल ऑफ मल्टीडिसिप्लिनरी, पीयर रिव्यू जर्नल, वॉल्यूम-04, जुलाई-2019, 
18.    खापर्डे, सुदा, पटेल, चेतन राम, कांकेर में रियासतकालीन जनजातीय समाज की परम्परागत लोक शिल्प कला का एतिहासिक महत्व, माइंड एंड सोसाइटी, वॉल्यूम 09, नंबर III और IV, सितंबर और दिसंबर 2020, पृष्ठ संख्या 53 से 56.
19.    गोयल, पीयुष, शिल्पकलाः आजीविका के साथ शिल्पकला का महत्वपूर्ण घटक, कुरुक्षेत्र, नई दिल्ली, मई 2023, पृष्ठ-38.
20.    खान, मुश्ताक, बस्तर के जीवन में बाँस, सहपीड़ीए.ऑर्ग/बांसबाबू-लाइफ-इन-थे-लाइफ-ऑफ़-बस्तर.
21.    गुप्ता, अरुणेश कुमार, छत्तीसगढ़ में बाँस उत्पादन की स्थिति एवं संभावनाएँ, अमोघवार्ता, वर्ष-03, वाल्यूम-03, इश्यू-2, 2023, पृष्ठ-207-208.

Recomonded Articles:

Author(s): गजेन्द्र कुमार

DOI: 10.52711/2454-2687.2025.00015         Access: Closed Access Read More

Author(s): हेमलता बोरकर वासनिक, बंसो सो नुरुटी, कमलेश गोगिया

DOI: 10.52711/2454-2687.2026.00005         Access: Closed Access Read More

International Journal of Reviews and Research in Social Sciences (IJRRSS) is an international, peer-reviewed journal, correspondence in....... Read more >>>

RNI:                      
DOI:  

Popular Articles


Recent Articles




Tags